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वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरणविद अमरनाथ झा को दी गई श्रद्धांजलि

बेतिया, 27 जून: आज दिनांक 27 जून 2026 को समाज-कर्मी-पत्रकार-लेखक और पर्यावरणविद अमरनाथ झा के निधन के उपरांत शोक सभा का आयोजन समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान, सुभाष नगर के सभागार में हुआ। विदित हो कि पटना स्थित हाॅस्पिटल में ब्रेन हैमरेज के इलाज के दौरान दिनांक 17 जून को उनका देहांत हुआ था. श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश कुमार गुप्त ने संचालक का कार्यभार संभाला और एसएसइवीएस के फाउंडर पंकज जी ने अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम में बेतिया निवासी अमरनाथ जी के परिवारजन भी ऑनलाइन जुड़े और उनके व्यक्तित्व-कृतित्व को याद किया। उनकी सुपुत्री रिद्धि ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि वे अपनी कामकाजी व्यस्तता के बावजूद बच्चों के साथ भी भरपूर समय बिताते थे। एक समतामूलक और बेहतर समाज के प्रति उनके समर्पण की वजह से मुझे अपने पिता पर हमेशा गर्व रहेगा।


उनके अभिन्न मित्र और वरिष्ठ साहित्यकार अरुण गोपाल ने उनकी सादगी और पत्रकारिता के प्रति निष्ठा व समर्पण को याद करते हुए उनकी ख़ूब प्रशंसा की और उनके निधन को व्यक्तिगत क्षति बताया। उनके अन्य अभिन्न मित्र सुशील शशांक ने रामनगर दोन में वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा में सुधार और उत्तर बिहार की छोटी नदियों, विशेषकर चंद्रावत नदी के बहाव व उनकी धाराओं से अनियोजित छेड़-छाड़ के विरोध में उनके प्रभावी लेखन को याद किया। गिरधारी राम ने उनके साथ नदियों के किनारे हुए पदयात्राओं का स्मरण करते हुए कहा कि पर्यावरण के साथ-साथ गंडक, सिकरहना व अन्य नदियों के प्रति उनका विशेष अनुराग था। वह ना सिर्फ इस विषय के मर्मज्ञ थे बल्कि वे गाँव–समाज के सभी वर्गों से जुड़कर लगातार सुनने-सीखने का भी प्रयास करते थे।
इंडिया टुडे के पत्रकार पुष्यमित्र जी ने कोसी नदी से जुड़े आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी की चर्चा करते हुए उन्हें पर्यावरण संरक्षण के एक समर्पित एक्टिविस्ट के रूप में याद किया। पटना के जानेमाने संस्कृतिकर्मी अनीश अंकुर ने उनके असमय निधन को नागरिक समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया और चित्रकला में उनकी गहरी दिलचस्पी को रेखांकित किया।
वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन झा ने कहा कि मेनस्ट्रीम मीडिया में काम करने से पूर्व उनके द्वारा बेतिया में शुरू किया गया समाचारपत्र ‘जवाबदेह’ काफ़ी चर्चित रहा। उनके संपादन में स्थानीय मुद्दों और अपराध से जुड़ी ख़बरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया जिसने समाज को एक दिशा देने का काम हुआ।
अभिषेक आनंद ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए उन्हें एक सरल, सच्चा एवं संवेदनशील लेखक और गुरु के तौर पर याद किया। पंकज जी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि वे एक निर्भीक पत्रकार के साथ-साथ ज़मीनी मुद्दों के प्रति एक समर्पित कार्यकर्ता थे। उनकी विद्वता और सादगी ने उनसे जुड़े हर व्यक्ति पर अमिट छाप छोड़ी। सीमा एंजलो ने भी उनके जनसत्ता व अन्य अख़बारों में छपे आलेखों का जिक्र करते हुए भावुकता से उन्हें हिन्दी पत्रकारिता का अनन्य विद्यार्थी कहा।
ग़ौरतलब है कि अमरनाथ जी ने पीटीआई समेत जनसत्ता जैसे नामचीन अख़बार में बतौर पत्रकार कार्य करने के अलावा कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर लेखन किया। साथ ही, उन्होंने जीवनपर्यंत जनसरोकार, पर्यावरण और समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को प्रखरता से उठाने का कार्य किया। शोक सभा में रामेश्वर प्रसाद, कलाम, वरिष्ठ साहित्यकार कमरुज़मा क़मर, खूबलाल पंडित सहित नागरिक समाज और साहित्य जगत से जुड़े कई लोग उपस्थित रहे।

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